प्रश्न हैं कई ???

बिखरे बिखरे प्रश्न हैं कई हर प्राणी के मन में
जिसने उत्त्तर जाना वह सफल हुआ जीवन में

पायल क्यूँ छम छम करती है – चूड़ी क्यूँ खन खन करती है
बादल क्यूँ घुमड़ के छाता है – सूरज क्यूँ उमड़ के आता है
अरे ! गौरी क्यूँ शर्माती है – जब याद बलम की आती है
यह फूल कैसे महकते हैं – पंछी क्यूँ वन में चहकते हैं

क्यूँ झरना झर झर बह्ता है – सागर क्या नदी से कहता है
सितारें कैसे झिलमिलाते हैं – क्यूँ चंदा को मामा बुलाते हैं
जलेबी में रस कैसे जाता है – क्या डाक्टर सूई लगाता है
भगवान् का नाम लेते ही मन कैसे शांत हो जाता है

माँ को बच्चे का आभास होते ही ममता कैसे पनपती है
पापा के मन भी प्यार की झांझर कैसे खनकती है
जब मन में हो सच्चाई तो डर नहीं क्यूँ लगता है
साफ़ न हो जब नीयत तो मन सोता है न जगता है

बच्चो की नींद क्यूँ उड़ जाती – परीक्षा जब भी आती है
यही पढ़ाई कैसे हमें जीवन जीना सिखलाती है
मस्तिष्क के अंदर यादें कब कैसे घर कर जाती हैं
आज़ादी की बात चले तो आँख ये क्यूँ भर आती है

क्यूँ छूटे न जीते जी मोह जीवन की कैसी माया है
बेटी क्यूँ धन पराया है- यह नियम किसने बनाया है
जलते दीपक का देखो तो कोई बाती कैसे बन जाता है
जन्म जन्म के बंधन का कोई साथी कैसे बन जाता है

दोस्ती कैसे होती है विश्वास कैसे हो जाता है
मन से मन मिल जाए तो कोई ख़ास कैसे हो जाता है
मिठास कहाँ पर चली गई क्यूँ कड़वापन है भरा हुआ
इंसान के अंदर का आदमी जाने कहाँ है मरा हुआ

बिखरे बिखरे प्रश्न हैं कई हर प्राणी के मन में
जिसने उत्त्तर जाना वह सफल हुआ जीवन में
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जवाब के इंतज़ार में- गुरचरन मेहता- त्रुटि क्षमा हेतु प्रार्थी

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