ड्योढी दईतरा बाबा के

दिल से दईतरा बाबा के,
ड्योढी पर शीश झुकाना होगा।
कच्ची घानी का तेल,
माथे पर मन से लगाना होगा ।
केहू खिलावे हलवा पुवा,
जमके भोग लगाना होगा।
जग्गू के माई का कहली,
दारू मुर्गा चढाना होगा ।
वर्षों बीत गइल पूजा के,
पंडित लेकर जाना होगा ।
माथे दर दउरी भरकर के,
दउरल फूल सजाना होगा ।
बेटवन भूखे पेट बितावें,
बाबा को दुलराना होगा ।
गाँव मुहल्ला हल्ला बोल,
गीत बाबा का गाना होगा ।
शिर पर चढि दारु जब बोले,
झगडा़ तुम्हें छुड़ाना होगा ।
मुर्गा खाके तोंद तनी तो,
हकीम तुम्हीं को लाना होगा।
पंडित पोंगा पाले पड़ी तो,
मंत्र वेद तुम्हें सुनाना होगा।
लड़ी पंडित पैसा पावे बदे,
लबदा लेकर दौड़ाना होगा।
दिल से दईतरा बाबा के,
ड्योढी पर शीश झुकाना होगा॥

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