ऎ खबर तू ज़रा……..

ऎ खबर तू ज़रा, तू ज़रा बेह जा,

अश्क बनकर इस दिल से उस दिल में रेह जा.

मैंने पूछा था तेरी कश्ती से,

तू ये पैगाम ज़रा तुझ संग ले जा.

मेरी राहों ने तो मूंद ली है आँखे,

तू तेरी राह में ये सफ़र कर जा.

टूटती साँसों को अब रहा न सहारा किसी का,

बिखरे साँसों को भी तू तेरे संग ले जा.

मै बिछड़ गया खुद से, नहीं ज़ेहन में कुछ मेरे,

उसकी यादे रमी बस, तू उसे भी संग ले जा.

आंसुओ के रंग ना होते, पर लाल नजर आते क्यू मेरे ,

तू मेरा अंग नहीं,पर मेरा संग ले जा.

तू ज़रा बेह जा, कुछ उसे केह जा,

हुई नसीब दो गज़ जमीन, ये खबर बस उसे दे जा.

ऎ  खबर तू ज़रा, तू जरा बेह जा,

अश्क बनकर इस दिल से उस दिल में रेह जा……

nitesh singh(kumar aditya)

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