शेरोशायरी

उनकी इक निगाह भी मेरी जिंदगी से महगीं है |
कैसे बताऊँ उनको कि उनकी निगाह ही बहकी है ||

इश्क कि आग में जलकर के हम खाक हुए |
सुनकर ये खबर एकदम से वो भी ताक़ हुए ||
गम से गैरों के दिलों के भी दो फ़ाँक हुए |
फिर वो मुस्कुरा के बोले डूबने वाले कब तैराँक हुए ?

मेरे महबूब को मुझपे ऐतबार न हुआ |
वजूद उनका मोहब्बत के लिए तैयार न हुआ||

लोग पीते हैं पानी शराब में |
हम तो मिला के पी गए जिंदगानी ख़्वाब में ||
जिंदगी मेरी गयी इसका मुझे शिकवा नहीं |
पर कसक हैं हम उनके न हो पाये ||

उनके जबाब को हम खुदा का पैगाम समझते हैं |
उनके नाम को हम मोहब्बत का नाम समझतें हैं ||

सोचा कि उनके घर तक मै दंडवत करूँ |
और माँगूँ उनसे मन्नत उनके दीदार की ||
ये बात उनको चुपके से मालुम हो गयी |
दर पर उन्होंने कांटें बिछा दिए ||

दिवाली के दिए तो बार बार जलतें हैं |
आशिकों के दिल तो बस एक बार जलते हैं ||

मेरे इश्क के जश्न में मेरा हमशकल गम मिला |
फुसला के उसने मुझको गम का जहर दिया पिला ||
बहुत रहमत की उसने जो मेरे कफ़न को सिला |
मुझे कब्र में दफना के मेरे ही जश्न में वो आ मिला ||

अगर फरिस्ते कब्र को खोदें तो इससे अच्छा और क्या होगा ?
खुदा जब खुद ही दफनाये तो उस बन्दे का नसीब क्या होगा ?

दिलोंजान की मोहब्ब्त में रही अब जान नहीं |
जो थे अपने अजीज उन्हें अब अपनों की पहचान नहीं ||
टूट कर बिखर चुके हैं जो दिल रहा उनमे कोई अरमान नहीं |
करता था कभी बन्दों की आरजू पूरी रहा वो भगवान् नहीं ||

दौलत की रोशनी में रकीब भी अजीज होते देखे |
समां दौलत का बुझ गया तो अजीज भी अजीब होते देखे ||

Leave a Reply