काफी है…

अक्लमंद के लिए इशारा काफी है,
मंद अक्ल को खून तुम्हारा काफी है।

अपनों के दुत्कारों ने तो मार दिया,
मुर्दा जले किसी के द्वारा काफी है।

वश में हो तो दुनिया कम पड़ जाती है,
मजबूरी में एक किनारा काफी है।

बचपन आज हराने लगा जवानी को,
वर्ना बच्चों को गुब्बारा काफी है।

छोटे छोटे शब्द हलाहल बन जाते,
दावानल के लिए शरारा काफी है।

पास नहीं तुम फिर भी मैं खुश रहता हूं,
तस्वीरों का मुझे नजारा काफी है।

दण्ड न मांगो आलिंगन का अवसर है,
अनुभूतिमय अश्रु की धारा काफी है।

सबको आजादी है गला काटने की,
सहनशक्ति में देश हमारा काफी है।

 

 

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