त्रिविम

मैं ढूँढता रहा अंतर,
अपनी बोली में
अपनी वेश-भूषा में
अपनी मजबूत मांसपेशियों में,
अपने बालों के रंग में
अपने गालों की चमक और चिकनाई में,
अपनी हुनर में
अपनी तहजीब में,
अपनी जाति की श्रेष्ठता में,
अपनी कौम में,
अपनी त्वचा के रंग में,
अपने मर्द, औरत या नामर्द होने में,
अपने जीवित या निर्जीव होने में |
मैं सबसे अलग
खुदा की नायाब नियामत |
पर उसने तो मेरी पूरी
त्रिविमीय तस्वीर खींचकर रख दी
सिर्फ तीन रेखाओं और समय की धार में |

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