नई पीढ़ी

अपनी प्रतिभा का सम्मान बहुत ज्यादा है,

स्वाभिमान कम है अभिमान बहुत ज्यादा है।

किशोर देते  पागल की संज्ञा वरिष्ठ को,

अनुभव पता नहीं है ज्ञान बहुत ज्यादा है।

मर्यादा का विनम्रता का गया जमाना,

बदमाशी में अब उत्थान बहुत ज्यादा है।

विचारवानों कि संगति में मजा  शून्य है,

घटिया लोगों में मुस्कान बहुत ज्यादा है।

अमृत जैसे अन्न भले ही कम पड़ जाएँ,

मद के स्वरुप में विषपान बहुत ज्यादा है।

धर्म नीति के ग्रंथों की अत्यधिक उपेक्षा,

अधर्म के दृश्यों में ध्यान बहुत ज्यादा है।

लाभ हानि का अंतर यदि वे नहीं समझते,

ऐसे में उनको नुकसान बहुत ज्यादा है।

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