सूची में

आज मैंने
फिर से सूची में
अपना नाम देखा |

सूची रोज-रोज छोटी
होती जा रही थी |
मेरे आगे वाले नाम कट चुके थे
और पीछे वाले भी |

मंदिरों में घंटे बज रहे थे,
शंख भी फूंका जा चुका था |
लिपिक रोज सूची में
सुधार कर रहे थे|
पृष्ठ बदल रहे थे,
नए नाम जुड़ रहे थे,
पुराने नाम हट रहे थे|

मेरे पृष्ठ पर
किसी की नजर
नहीं पड़ रही थी
और अंत में
सिर्फ मैं
और मेरे पृष्ठ
ही रह गए |

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