मैं इश्क हूँ

मैं इश्क हूँ

 

दिल से सोच,

ना दिमाग पे जोर डाल,

प्यार से गले लगाने की एक चीज हूँ मैं.(1)

नज़र उठाके देख,

झुकी नज़र से ना सवाल कर,

बेहिचक दिल में बसाने की एक चीज हूँ मैं.(2)

समझ वक्त की फितरत को,

बेमतलब वक्त ना जाया कर,

वक्त पर काम आने की एक चीज हूँ मैं.(3)

अबकी बार हूँ आ गया,

नहीं बार- बार मैं आता हूँ,

दुनिया से छिप जाने की एक चीज हूँ मैं.(4)

दवा भी करता मैं ही हूँ,

दुआ में भी मैं शामिल हूँ,

शिद्दत के बाद पाने की एक चीज हूँ मैं.(5)

हसरत बनकर करता हूँ,

हर किसी पे राज़ मैं,

बेबसी में रूलाने की एक चीज हूँ मैं.(6)

हँसी भी बनकर छाता हूँ,

चेहरों पर मैं कभी- कभी,

मुद्दत के बाद आने की एक चीज हूँ मैं.(7)

दस में से हर नौ को,

शिकवा है मेरी रहमत से,

फिर भी सर चढ़ जाने की एक चीज हूँ मैं.(8)

अजब फितूरी आरज़ू हूँ,

खुद का वज़ूद भुला दे जो,

फिर भी वज़ह मुस्कुराने की एक चीज हूँ मैं.(9)

 

मैं क्या चाहूँ मैं जानूँ,

कोई क्या चाहे ना सोचता हूँ,

अदब से हक़ जताने की एक चीज हूँ मैं.(10)

एक झलकभर के खातिर,

घंटों खड़ा रहे राह में,

तनहा मौज़ मनाने की एक चीज हूँ मैं.(11)

कोई कुछ कहे, कोई कुछ कहे,

पहेली हूँ मैं, एक राज़ हूँ,

आज भी समझ ना आने की एक चीज हूँ मैं.(12)

:- सुहानता शिकन

                                                                (19.11.2013)

One Response

  1. नवीन सृजन "भगवती" lokeshwarsahu 06/06/2014

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