यक्षमा निवारन

पृथक यक्षमा मनुज किय।

चिवुक नेत्र कर्ण जिहवा से तेरा।
पृथक नाड़ी ते चवौदह यक्षमा रोग से आज अब,
नाड़ी कष्ट वक्ष कन्धे, भुजाओ की उष्णिह ॥१-२॥
हृदय हलीक्ष्ण,प्लीहा-पार्श्व उदर यकृत यक्षमा जो॥१-३
कुक्षियो नेत्र उदर से यक्ष्मा रहा भगाय।-४॥
कटि के निम्न पट के उच्च गुह्य भाग और नेत्र से ।-५॥
उगली नखो अस्थि मज्जा स्थूल सूक्ष्मते।-६॥
त्वच्चा जड़ो अगो कूपो से,यक्षमा रोग हटाता रोगिन।
महर्षै विवाह मत्र ते, कश्यप के आज हटाता रोग।-७॥

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