प्रेमी मा लीन

जन्म जग मे जगदीश्वर दीन्ह।
भूल गये पूजा पाठ ज्यो मीन ॥
आशा त्यागें नेकु बन दीन ।
प्यार भटकि पथ हीन ।।
प्रीयतम सेवा छोड़े प्रेमी मा लीन ।
आकुल-ब्याकुल उन्माद बाजे बीन ।।
कानाफूसी नई नवेली कीन ।
चिन्ता निज चिता भला छेम हीन ।।
कल्पना छन-छन छलकती જ્ઞાन दीन ।
आभा अधर पर मन्द मुस्कान लीन ।

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