ऐसा हो मेरा आज

ऐसा हो मेरा आज

 

क्यों बन्दे तू डर रहा है आज,

क्यों पसीने से है तर माथा तेरा,

क्यों अंधेरे में घिर गया है आज,

नशे ने कर लिया है कैद तुझको,

बन गया तू नशेबाज।

दोस्तों ने दिया है दग़ा,

खुद ही निकला, खुद का द़गाबाज,

मौत दे रही है दस्तक,

उम्मीदों ने छोड़ दिया है साथ,

जिंदगी की फि़क्र कर, क्यों पुकारता है मौत आज।

 सुधरने की राह पकड़ चल खडी है वह बांहे पसार,

चले जा उसकी बांहों में होगा फिर तेरा सुधार,

होंगे दोस्त मीत तेरे उम्मीदें फिर होंगी रौशन,

होगा फिर खुदा मेहरबान तुझ पर,

बेइंतहा मिलेगा प्यार तमन्ना जीने की फिर होगी,

तू कह उठेगा, ऐसा हो मेरा आज,

ऐसा हो मेरा आज,  ऐसा हो मेरा आज।

उद्धृत: लेखक की पुस्तक ’ मधु बावरे ’ से।

 

 

 

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