नन्दलाल (गारी)

 

तू तो नन्दलाल ।

जनमवा कै कपटी।
सब तो कहला,

तोहरे,

घरिला भरले आवै रामा ।
भरले घरिलवा,

जगती पै पटकी ।
तू तो नन्दलाल,

जनमवा कै कपटी ।
तब तो कहेला,

तुम्हरी नैया पार लगैबे रामा ।
डूबत नैया ,

बिचवा में नैया त अटकी ।
तू तो नन्दलाल,

जनमवा कै कपटी ।
तब तो कहेला ,

तोहरा अंग नाही छुवबै रामा?
बारी उमरिया मोरी,

झुलनिया में उलझी ।
तू तो नन्दलाल,

जनमवा कै कपटी ।
जनम लिये ,

देवकी जी की कोखिया रामा ।
जाय के जसोदा,

के गोदिया में समटी ।
तू तो नन्दलाल,

जनमवा कै कपटी  ॥

Leave a Reply