राखो चुदरिया संवारि

भीगल जाले मोर चुंदरिया, छिपाये छिपे नां द्युत दागरी ।
चूक चटक चंदा जो छिपा था,चुंदरी तो चटकार री ।।
भीगल चुदरी निखिल निचोड़ा, मोहन ज्यों सपने साथरी।
घट-घट खोजत नीक चुदतिया,पायो अपने पास री ।।
इहै चंदरिया नाहिं चुम्हारी, प्यारी-प्यारी यारी दुलारी ।
जेते सुन्दर चुंदरी पायो, तेते જ્ઞાन मान गान अगाधरी ।।
जाबुन लायो मोहन मोरे, मौन ज्यों महा भंदार री ।
चुनरी चुर चारो चौकछु रे, सूर्य चन्द्रमा चुन्यो संसार री ।
आंगन लायो पिया चुंदरिया भीगी- भीगी झीनी सारी ।
गणपति गावत बीच बजारे नीक चुंदरिया नीक किनारी ।
रगी चुंदरिया को रंग निराला मागत मधुवन माँ नन्दलाला।
मंगल मंदिर बूझत न्यारी देखत बारी-वारी- सारी ।
सोलह सी बंद चुंदरी चोखा, चार चौपटा नाग पास री ।
रंगना धूमिल चुंदरी चटकीली, राखो राजे इसे संवारि री।
रंगी चुदरिया को रंग निराला, मागत मधुवन मां नन्दलाला।
मंगल मंदिर बूझत न्यारी,देखत बारी-वारी-सारी ॥
सोलह सी बंद चुदरी चोखी, चार चौपटा नाग पासरी ।
रंग धूमिल चंदरी चटकीली, राखो राजे इसे संवारि री॥

Leave a Reply