जगमग

हृदय के गति को गतिमान करो।
धरती मां का सम्मान करो।।(मुक्तक)
एक पताका छोड़ जाता हूं निशा के पास।
भू धरा शमा जले दीप बन कर हर हाथ।।
शिव- शंकर शम्भु शशिन्द्र रहे पास।
जन-जन जगदीश्वर दिल हर्षायें साथ।।
जहां कण-कण रमते रहते हिल मिल हाथ।
वह दीप धरा पर रंग लाये जगमगाये पास।।
यहां कैसा छाया अंधेरा घनेरा मध्य रात्रि।
प्यारा जगमग तारा बन छायें धरा के पास।।

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