अब वो शाम नहीं आती

दोस्तों से मिलती,

दिनचर्या की गीत सुनती,

चाय की चुस्कीयों के साथ,

अब वो शाम नहीं आती ॥१॥

 

दोस्तों में जोश बढाती,

आशाओं के नये किरण जगती,

हिम्मत रख, एक दिन जीतेगा,

अब वो शाम नहीं आती ॥२॥

 

कंसलटेंट को हलाल करती,

सेलामारा में बिरयानी और खुस्का खाती,

पप्पू की समस्या सुलझाती,

अब वो शाम नहीं आती ॥३॥

 

जन्म दिवस पे पनीर संग मुर्गा दबाती,

मुख से मै, जो खूब लुभाती,

देर रात घर वापस आना,

अब वो शाम नहीं आती ॥४॥

 

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