भगवान् चित्रगुप्त स्तुति हरिगीतिका

मसिलेखनीकरश्यामवर्णी सृष्टिपूजितध्यायितं |

दुःखपापहर्तामोक्षदायक न्यायईशंवंदितं|

सदबुद्धिदायककर्मयोगी ओंकारंपूजितं,

शरणागतंप्रभुरूपपावन चित्रगुप्तंशोभितं||

–इं० अम्बरीष श्रीवास्तव ‘अम्बर’

Leave a Reply