क्या गुनाह था

जन्म हुई एक लक्ष्मी की,

पलना छोड कचरे में डाल दिया।

एक बेब्श बच्ची थी वो,

क्या यही गुनाह उसने किया।१।

 

ईश्वर ने भेजा धरती पर,

माँ का सम्मान उसने दिया।

इन्शान की गैरत तो देखो,

पल में उसने कुर्वान किया॥२॥

 

प्यार की चाहत ने उसकी,

जीवन के चाँद भी चीन लिये।

बस कुछ बर्षो में ही उसको

अपनों से बेगाना कर डाला॥३॥

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