ज़िंदगी की उलझनों ने हमें जीना सिखा दिया

ज़िंदगी की उलझनों ने हमें जीना सिखा दिया I
अच्छी की दोस्ती के यारों ने पीना सिखा दिया I
हाल ए दिल न कहते बना न सहते ही बना,
अपनों ने ही ज़ख्मे जिगर सीना सिखा दिया II

काँटों ने इस उलझी ज़िंदगी से जूझना सिखा दिया I
पहेली जो कभी सुलझी न थी, बूझना सिखा दिया I
जरूरतों ने सिखाया गूँदना जीवन रूपी आटा हमें,
लोगों को परेशानी में देख आँखें मूंदना सिखा दिया II

पतझड़ ने बहारों से बैर कर झड़ना सिखा दिया I
अपने दोष दूसरों के सर पर मढ़ना सिखा दिया I
हसरतों ने भी सिखाया कुचल कर आगे बढ़ना हमें,
पत्थरों ने भी तो ईटों से अब लड़ना सिखा दिया II

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सर्वाधिकार सुरक्षित — त्रुटि क्षमा हेतु प्रार्थी — गुरचरन मेहता

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  1. Muskaan 11/12/2013

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