होली की बजार

नया जमाना राग नया था,
होली आई फाग नया था।
ढोल मजीरा साज सजा था,
फाग राग अनुराग जगा था ।
धोती कुर्ता आग लगा था,
चुनरी चादर चांद चढा था।
लाल गुलाल सबाब सजा था ,
मोहन मंगल प्यार भरा था।

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