निर्माण-गीत

बज रही बिगुल, जगा रहा नया बिहान !
क़दम-क़दम से ताल दे चला है नौजवान !!
हवा में हरहरा उठे हरे-हरे पटेड़,
श्रमिक-श्रमिक के मन में कुछ नवीन राग छेड़ ।

यहाँ विहंग का न प्रातःकाल गान है,
टोकरी, कुदाल, धुरमुसों की शान है ।
अरुण-वरण किरण से भर रहा है आसमान ।
क़दम-क़दम से ताल दे चला है नौजवान ।

काँध पर कुदाल, मुख में गीत, मन में प्यार,
नवीन बाँध बाँधने चले हैं ये कुमार ।
नवीन कल्पना, नवीन योजना हजार,
नई हवा की पीठ पर चढ़े हुए सवार ।
नए-नए करों में आज देश का निशान ।
क़दम-क़दम से ताल दे चला है नौजवान ।

ये समझ चुके हैं अपनी शक्ति का स्वरूप,
ये निकल चुके हैं अपना ले के सत्य रूप ।
ये करेंगे वह, जो कोई कर सका नहीं,
ये बनेंगे वह, जो कोई बन सका नहीं ।
गाड़ने चले हैं चंद्र-सूर्य पर निशान !
क़दम-क़दम से ताल दे चला है नौजवान !!

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