चंचला चितवन निरख

चंचला चितवन निरख चित चारु चंचल हो गया |
भावना के भान से मेरा ज्ञान धूमिल हो गया ||
हाय तिरछे नैन में वो कैसे तीखे तीर थे |
तीर जब दिल पर लगे तो घाव भी गम्भीर थे ||

नैन में भी नाँगपांशों जैसे होते जाल हैं |
अनगिनत योद्धा बधें है ऐसे ये जंजाल हैं ||
नैन सर की मार से जो हो बचा वो कौन हैं ?
वो त्रिलोकी का विजेता हैं कहाँ ?औ कौन हैं ?

चुन लिया है प्रेम पथ अब सोचना कुछ भी नहीं |
मार्ग में शमशान हों या कांश कुश कुछ भी कहीं ||
वर्जना को भूल कर मै भावनामय हो गया |
प्रेमरस का पान करके मै अमर सा हो गया ||

आचार्य शिवप्रकाश अवस्थी
9582510029

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