जय चित्रगुप्त भगवान्

Chitrgupt bhajan-deepak srivastava

ब्रह्मदेव काया से निकली, अमर ज्योति अविराम तुम्हारी|
चित्रगुप्त जी तुम्हे पुकारें, मिलकर के संतान तुम्हारी||

हे प्रभु तुम तो करते रहते,
पाप-पुण्य कर्मों का लेखा|
जब भी ढूँढा, जब भी पूजा,
कण-कण में तुमको ही देखा|
दिव्य-शक्ति तुम-न्याय-शक्ति तुम, यमपुर में है शान तुम्हारी,
चित्रगुप्त जी तुम्हे पुकारें, मिलकर के संतान तुम्हारी||१||

सुन्दर कलम-दवात लिए है,
हे प्रभु तेरा रूप अनोखा|
मुख-मण्डल पर दिव्य तेज है,
पाप-पुण्य का करते लेखा|
माता ईरा और नन्दिनी के संग पूजन ध्यान तुम्हारी|
चित्रगुप्त जी तुम्हे पुकारें, मिलकर के संतान तुम्हारी||२||

–दीपक श्रीवास्तव

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