पहचान

साल भर से, पहचान है उनसे;
वो आज हुये, परेशान हमसे;
कहते हैं, नादान है कबसे;
पर है नहीं, मुहब्बत तुमसे.

छोड़ दो, ये पागलपन है;
समय व्यतीत का, साधन है;
समय बड़ा, अनमोल रतन है;
रौशन…सम्भालो…!!!
हो रहा, इसका पतन है.

क्या पाओगे? मेरा इन्तजार कर के;
टूट जाओगे, एक दिन हार के;
बेकार तुम्हारा, ये पागलपन है;
अंत इसका तो, बस निधन है.

कृप्या रौशन, तुम वापस जाओ;
हम दुश्मन हीं, ठीक है;
नजगदीकी ना, तुम बढ़ाओ;
तुम्हारे लिये हीं, ठीक है.

मेरी हालत का, खयाल है उनको;
पर इससे नहीं, कोई काम है उनको;
बस ख़ुद से हीं, प्यार है उनको;
लगता है ये, अब मौत हमको;

हम जानते हैं, उन्हें;
प्यार है हमसे;
पर डरते हैं;
इकारार करने से.

रौशन आपको, याद रहेगा;
हर पल, आपके साथ रहेगा;
जिन्दा रहा तो, साया बनेगा;
मर गया तो, साँस बनेगा;

…धन्यवाद​
-रौशन कुमार सुमन