==चिराग जलना चाहिए==

सी लिए हों होठ तो भी गुन गुनाना चाहिए ।
अब पिटारी से कोई खुसबू निकलनी चाहिए॥

बदबू नुमा शहर सारा शाम ढलनी चाहिए ।
खट्टे मीठे स्वाद बहुत कुछ बदलना चाहिए॥

रहनुमें सारे किनारे फिर मचलना चाहिए ।
ठूठी सियासत बहुत बदरी अब सम्हलना चाहिए॥

विद्रोह की ज्वाला न भड़के जतन करना चाहिए ।
जनता सारी समझ रही खुद समझना चाहिए ॥

बुझ चुके वस्ती के चिराग पुन: जलने चाहिए ।
दीपक जलते महलो में दिल में भी जलना चाहिए॥

गाँव के सारे शहर को फिरअन्न मिलना चाहिए ।
अमन हो परदेश सारा रहमों करम होना चाहिए

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  1. राम केश मिश्र राम केश मिश्र 30/11/2014

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