माँ !!!

एक नन्ही सी दुनिया हो मेरी बस मुझे इतना चाहिए.

कुछ भी न हो वहां , कोई भी न हो वहां ….

फीर भी एक नसीब चाहिए…

एक नन्ही सी दुनिया हो मेरी….

में अजीब ढंग से जी लू वहां पे.

अजीब मेरी चाल हों.

कुछ बड़ी सी बदमाशी करू और उससे बुरा हाल हो..

कुछ रोना कुछ हसना ..

कभी रूठना कहीं इतराना ……

जिंदगी को समजने की न अक्ल चाहिए..

एक नन्ही सी दुनिया हों मेरी..

वहां न तो कोई बोज हो कुछ करने का ..

और न ही कोई डर हो कुछ खोने का.

नन्ही सी इन हथेली को थामे माँ तेरा साथ चाहिए..

एक नन्हीसी दुनिया हो मेरी..

कुछ कमी न हो वहां पे ,कुछ गम भी न हो वहां पे.

कुछ लोग हो इंसान से, कुछ लोग हो भगवान् से…

नन्ही सी मेरी जान को ना कोई खिलौना चाहिए..

एक नन्ही सी मेरी दुनियां हो….

और मुझे कुछ नहीं चाहिए.

 

One Response

  1. Dr Jai 03/11/2013

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