साथी कोई साथ न दे

 

साथी कोई साथ न दे तब भी हम तेरे साथ हैं

तुमने जो शुभ कर्म किया इसलिए आज हम साथ हैं

 

कदम बढ़ाओं मंजिल का पथ कब से तुझे निहार रहा

देखो कोई खड़ा राह में लिए आज सौगात है

 

मेहनत कर पौधे को तुमने खून पसीने से सींचा

इसीलिए इन कलियों पर अब हक तेरा दिन रात है

 

तुमने अपने बाहुबल से सपनों को साकार किया

कर्मक्षेत्र के कुरूक्षेत्र में तूं ही मेरा पार्थ है

 

जहाँ चाह है वहाँ राह बन जाता है यदि चाहें हम

‘सुधाकर’ की चाँदनी में सूरज का वह ताप है.

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