लगा दो आग दुनियां में

 

लगा दो आग दुनियां में ये दुनियां है हीं ऐसी हीं

डूबा दो इसको पानी में ये दुनियां है हीं ऐसी हीं

 

कहो जाकर के दिनकर से गिराएँ आग के शोले

मिटा दो इसको नक्षे से ये दुनियां है ही ऐसी हीं

 

कहो अम्बर से बरसाएं गरल की धार धरती पर

सुला दो मौत से सबको ये दुनियां है हीं ऐसी हीं

 

बनाओ अब नई दुनियां सजा कर अपने हाथांे से

भुला दो मन से वो दुनियां वो दुनियां है हीं ऐसी हीं

 

‘सुधाकर’ चाँदनी दे दो कहो दिनकर से दें आभा

रचो संसार फिर नूतन ये दुनियां है हीं ऐसी हीं.

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