घर को हीं आग लग गई

 

घर को हीं आग लग गई घर के चिराग से

क्योंकि न हमने रखे थे दीपक सम्हाल के

 

अपने हीं कुल्हाड़ी से घायल हुए खुद पाँव

अपने ही तन पर छिड़के हैं कीचड़ उछाल के

 

जिससे किए थे दुश्मनी वो दोस्त है बना

अपने हीं घर में रखे हैं अजगर को पाल के

 

गैरों से निपट लेना तो विलकुल आसान है

अपनों में गैर छिपा है पर्दा को डाल के

 

अपना हो या पराया जरा माँग के तो देख

‘सुधाकर’ तो दे चूका है कलेजा निकाल के.

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