वो सिक्कों से बेचते हैं

 

वो  सिक्कों से  बेचते हैं  इमान  अपना

हम  न रूपयों से बेचेंगे  दलान  अपना

 

माना कि पैसा कुछ है मगर सब कुछ नहीं

मैं ना  सोने से  बेचूंगा  समान  अपना

 

आज सब कुछ बिकता है इस जमाने में

मैं ना  हीरों  से  बेचूंगा  अरमान  अपना

 

मुझको सिक्कों से ना तौलो उनके इमान की तरह

साहित्य का होगा अपमान अपना

 

‘सुधाकर’ का दिल तो एक दरिया है

जहाँ उठता है एक तूफ़ान अपना.

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