जब कलम को हथियार बनाया हमने

 

जब कलम को हथियार बनाया हमने

जीत कर समर में हर वार दिखाया हमने

 

हमें मारने को हरदम हथियार लिए फिरते हैं

उन्हें मारने को यही समाचार निकाला हमने

 

कई मुकदमों कई थानों में नाम मेरा दे डाला

पर अल्ला की कसम कभी ना गुनहगार बनाया हमने

 

आज अपने गुनाहों की है काट रहे कब से सजा

उनके नफरत को प्यार, प्यार सीखाया हमने

 

मेरी कलम उनके हथियार से ना कम निकली

‘सुधाकर’ शब्दों का वार सीखाया हमने.

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