दर्द इतना गहरा है कि

 

दर्द इतना गहरा है कि सो न सका हूँ

पीड़ा इतनी गहरी है कि रो न सका हूँ

 

आँखों में लाली क्यों है जब तुमने पूछा

मैंने कहा कि मित्र रात को सो न सका हूँ

 

बहुत किए थे वार न हार माना था मैंने

गम है कि कोई क्रांति बीज मैं वो न सका हूँ

 

आन जगे हैं क्रांतिदेव अब तन में मेरे

वीरों के उस चिता भस्म को धो न सका हूँ

 

चलो जला दें एक मशाल इस चौराहे पर

अमरों के अरमानों को संजो न सका

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