सीता हरण

देख वन में स्वर्ण मृग
सीता जी का मन ललचाया
स्वामी करते हो मुझसे प्रेम
ला दो स्वर्ण मृग , मन को है अति भाया |

इच्छा न थी, रखने पत्नी का मान
तीर धनुष हाथ लिए
आगे आगे स्वर्ण मृग, पीछे भागे श्रीराम|

नज़रों से ओझल हो गए
दूर जंगल में मानो दोनो खो गए
माया का खेल रचा था
स्वर्ण मृग तो मारीच बना था |

मरने से पहले जो करना था कर बैठा
कहराता कहराता, भईया लक्ष्मण -२ कह बैठा,
सुनकर कहराती पुकार
सीता मइया व्याकुल हो बैठी
लक्ष्मण जाओ जल्दी जाओ
स्वामी ने पुकारा है तुम्हारा नाम|

कैसे छोड़ अकेला, भाभी को जंगल में जावे
जाने से किया इनकार
लक्ष्मण तेरी नीयत में खोट है
सीता जी ने किया प्रतिकार |

लक्ष्मण जी को युक्ति सूझी
कुटिया के चौतरफा रेखा खींची,
जब तक मैं और भईया न आएं
चाहे जैसी भी विपदा आए
रेखा के बाहर पांव न जाए |

लक्ष्मण जी क्या गए
चिमटा लिए इक सन्यासी पहुंच गए,
अलख जगाणा हरि गुण गाणा
राम नाम धुन गाते हैं
भिक्षाम देही भिक्षाम देही माता |

भिक्षा ले मइया द्वार पर आई
यह लो भिक्षा पुकार लगाई
सन्यासी थोड़ा आगे आया
पर लक्ष्मण रेखा पाट न पाया |

सन्यासी ने इक युक्ति लगाई
धर्म की आड़ में
कुटिया से बाहर आकर भिक्षा दो
की रीत बतलाई |

दान धर्म की रीत निभाने
रघुकुल की लाज़ बचाने
भिक्षा लेकर मइया बाहर आई
लांघ के लक्ष्मण रेखा |

यह लो भिक्षा मइया ने हाथ बढ़ाया
फैंक के चिमटा सन्यासी ने नया रूप बनाया,
सीता: सीता: प्यारी सीता
देख तुझको लेने रावण है आया |
(पुष्पक विमान में ले उडा माँ सीता को रावण )

लक्ष्मण पहुंच चुके थे उस ओर
भईया लक्ष्मण -२ उठा था जहाँ से शोर,
भाई लक्ष्मण तुम यहाँ !
क्यूँ और कैसे पधारे ?

प्रसन्नता का पार न था
सकुशल जो थे भ्राता श्रीराम ,
भाई ने भाई को गले लगाया
घटित हुआ घटनाक्रम बतलाया|

श्रीराम व्याकुल हो बैठे
सीता अकेली कुटिया में ? जानकर
संग लक्ष्मण तुरंत पंचवटी की ओर भागे |

लक्ष्मण संग पहुँचे कुटिया
सीता सीता , भाभी भाभी , अधीर पुकार
ज़र्रा ज़र्रा रोने को आया
पर ना सीता जी को पाया |

कहाँ गई? क्या हुआ? कौन ले गया?
(सीता को हर, ले भागा था रावण)
गम में डूबे राम |
sitaaaaaaaaaaaaa

2 Comments

  1. Dr Jai 03/11/2013

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