लाज मोरी राखा

लाज मोरी राखा हे बनवारी|

गलियाँ गलियाँ घुमें सुदामा|
छुधा पीर भय भारी |
मर्जी भई दीनानाथ की |
बन गयी कनक अटारी |
लाज मोरी राखा हे बनवारी |
बिच सभा में बैठि द्रोपदी |
त्राहि गोविन्द पुकारी |
खैचत चीर भुजा दोनों फाटत |
बढ़ गयी पीताम्बर सारी |
लाज मोरी राखा हे बनवारी |
छप्पन कोटि जल मेघ बरसे |
इंद्र कोप भय भारी |
डूबत बृज को बचा लिए तुम |
नख पर धरै गिरधारी |
लाज मोरी राखा हे बनवारी |
भारत में भर दूल का अण्डा |
पक्षी रहत पुकारी |
अब तो प्राण हिय तुम |
कटला संकट भारी |
सुख मंगल सुख कय पालक |
निस दिन आस तुम्हारी |
लाज मोरी राखा हे बनवारी ||

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