फ़रमान

फ़रमान

 

वन-ग्वालों का

वर्चस्व – अहं

हुंकार !

फ़रमान –

’यहां वर्जित हैं – शांति प्रयास ।’

अन्यथा

गाड़ दी जाएंगी कील ।

सुन वर्जना

बुद्ध मुस्कराए

शांति हेतु

सहज बोले -’मंजूर !’

समवेत अनुगूंज हुई –

आमीन .., आमीन…, आमीन…!

 

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