गजल

फिक्र किसे है महफिल मे मेरा बदनाम होता

मजा तो ये है आप के नाम से जुड़ा हुआ मेरा नाम होता

दिन निकल जाती मीठी मीठी बातो से
रात को महफिल सजाने भरी हुई जाम होता

किस्मत हमारी देख के जलते दुनिया वाले
सुबह होती आप के साथ और आप के साथ ही शाम होता

कट जाती हमारी भी बक्त कभी इंतज़ार मे
खोलता लिफाफा जिसमे आप से मिली कोई पैगाम होता

रहती नही कोई ख्वाहिस मेरी तब अधूरी
कब्र मे जाते भी मुझे आराम होता

हरि पौडेल
नेदरल्याण्ड

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