दामन का दाग

दामन का दाग

 

मैं नहीं धोना चहता मेरे दामन का दाग

नहीं तो उजास से कालिख का दिल टूट जायगा ।

 

दाग धोकर दाग लगाने से,फिर धोने से

क्या दामन दृष्य सुधर जायगा ?

 

धोते रहे यों ही दामन बार-बार

तो दामन ही छलनी होजयगा ।

 

बेहतर होगा वही एक दाग

जिससे दूसरा ना लग पायगा ।

 

इतना क्या कम है ’निवास’ ?

कि दामन तो फटने से बच जायगा ।

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