ये जिन्दगी तेरा ही था

क्या करूँ कैसे जियूँ
ये मुझे अब तूँ बता
जो भी था मेरा नही
ये जिन्दगी तेरा ही था
तुम मेरी मोहब्बत थी
थी नही जरुरत कोई
आबरू उडाकर मिले
वह शोहरत शोहरत ही क्या
पियूँ नही तो जियूँ कैसे
ये मुझे अब तूँ बता
जो भी था मेरा नही
ये जिन्दगी तेरा ही था
शामको तेरी चौखट में होते
रात हो जाती ढेर वहीँ
आँखें होती बरबस नमी
होंठो में न कोई हंसी
न रोऊँ तो हसूँ कैसे
ये मुझे अब तूँ बता
जो भी था मेरा नही
ये जिन्दगी तेरा ही था
तेरी महफिलको देखता रहा
लोगों का आनेका शिलशिला
हम तो तेरे गुलाम थे
किया कभी न कोई गीला
ये क़यामत अब सहूँ कैसे
ये मुझे अब तूँ बता
जो भी था मेरा नही
ये जिन्दगी तेरा ही था
हरि पौडेल
नेदरल्याण्ड

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