तलाश पूनम की-रात अमावस की

तलाश पूनम की-रात अमावस की

जश्ने-दिवाली है, दिवाली की रात है,
फलक की गोद में रौशन, सितारों की कायनात है।
इस महताबे-कायनात में, नूरे-आसमाँ   ढूंढ़ता हूँ,
आज कोई नूरे-निशान ढूंढ़ता हूँ।

जश्ने-तारीख है, कहीं मौज है कहीं मस्ती है,
हुस्न ही हुस्न है हर तरफ, मगर,..
मैं, हुस्न की इन्तहा ढूंढ़ता हूँ।
आज कोई नूरे-निशान ढूंढ़ता हूँ।

तस्वीरे-जाना की तस्वीर लिये बैठा हूँ
कब ताबीर हो, इक उम्मीद लिये बैठा हूं।
ज़रे-मखमली लिबास में, ज़रो-ज़ेवर से दमकती,
कोई नूरे-आफताब ढूंढ़ता  हूँ ।
इक कमसिन, नूरे-जबीन, पर्दा नशीन,
इक महज़बीं ढूंढ़ता हूँ।
कुछ पल उसकी शानों पर, सर रख, सुकूं पा सकूं,
आज कोई नूरे-निशान ढूंढ़ता हूँ।

हर तरफ नजर दौड़ाई मग़र,
हर तरफ मायूसी ही नजर आई,
जब नज़र आई हुस्नबानो तो,
क्लब, होटल, और नशे के बाज़ार  में  नज़र आई।
लड़खड़ाते  पाँव, बहकती जुबाँ  ,
मरमरी हाथों की जगह,
कांपते हाथों  में  नशे का जाम,
गुलाबी होठों की जगह पथराये होंठ,
नीचे आंखों के परछाई के निशान।
बस रह गई यही पहचान,
इक नगीना-ए-हुस्न, बन गई,
नशे बाजी की पहचान।
आज नशे में गिरफ्त,
हुस्न की असली पहचान ढूंढ़ता हूँ,
अमावस की रात में, पूनम का  चाँद  ढूंढ़ता हूँ।
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  1. gopi 23/10/2013

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