कस लो कमर हे हिंद वासियों !!

कस लो कमर हे हिंद वासियों, हिंदी को चमकाना है,

भारत माँ के माथे की बिंदी में इसे सजाना है । 


अब बेड़ियों से आज़ादी इसको हमें दिलाना है,

जो अधिकार मिला नहीं है, हम सबको दिलवाना है । 


हर कोने में हिन्द देश के हिंदी को पहुँचाना है,

हर हिंदी भाषी को दिल से बीड़ा ये उठाना है । 


संस्कृत की इस दिव्या सुता को जन-जन से मिलवाना है,

भारत को अपनी भाषा में, विकसित करके दिखाना है । 


कमतर नहीं किसी भाषा से, दुनिया को दिखलाना है,

अपने हर आचार, विचार, हर व्यवहार में लाना है । 


अपने दर से दिल्ली तक, सर्वत्र इसे अपनाना है,

कस लो कमर हे हिंद वासियों, हिंदी को चमकाना । 

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