कर तो लो आराम

रंजिश में ही बीत गई है तेरी तो हर शाम,

छुट्टी लेकर बैर भाव से, कर तो लो आराम |

 

आपा-धापी, भागम-भाग में,

ठोकर खाकर, गिर संभलकर,

कभी किसी की टांग खींचकर,

कभी गंदगी में भी चलकर |

 

यहाँ से वहाँ दौड़ के करते, उल्टे सीधे काम,

छुट्टी लेकर भाग-दौड़ से, कर तो लो आराम |

 

कभी किसी की की खुशामद,

कभी कहीं अकड़ कर बोले,

कभी कहीं पे की होशियारी,

कहीं-कहीं पे बन गए भोले |


बक-बक में ही गुजर गया, जीवन हुआ हराम,

छुट्टी लेकर शोर-गुल से, कर तो लो आराम |


वक्त बेवक्त अपनों की सोची,

सबके लिए बस लगे ही रहे,

झूठ-सच की करी कमाई,

पर पथ में तुम जमे ही रहे |


       अपनों के लिए पीते ही रहे, स्वाद स्वाद के जाम,

       कुछ वक्त खुद को भी देकर, कर तो लो आराम |

One Response

  1. gopi 24/10/2013

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