इक नई दुनिया बनाना है अभी

आज फिर से, एक नया सा, स्वप्न सजाना है अभी,

आज फिर से, इक नई दुनिया बनाना है अभी |

 

कह दिया है, जिंदगी से, राह न मेरा देखना,

खुद ही जाके, औरों पे, खुद को लुटाना है अभी |

 

साख पे, बैठे परिंदे, हिल रहे हैं खौफ से,

घोंसला उनका सजा कर, डर भागना है अभी |

 

लग गई है, आग अब, दुनिया में देखो हर तरफ,

बाँट कर, शीत प्रेम फिर से, वो बुझाना है अभी |

 

जा रहा है, वह मसीहा, रूठकर हम सब से ही,

रोक कर उसका पलायन, यूँ मनाना है अभी |

 

दिख रहे, सोये हुए से, जाने कितने कुम्भकरण,

पीट कर के, ढोल को, उनको जगाना है अभी |

 

देखती, माँ भारती, आँखों में लेके, अश्रु-सा,

सोख ले, उन अश्क को, कुछ कर दिखाना है अभी |

 

राह को हर, कर दे रौशन, रख दूं ऐसा “दीप” मैं,

आज फिर से, इक नई दुनिया बनाना है अभी |

Leave a Reply