मेरी चाहत

क्या हुआ जो तूने ये होंठ सिल रखे,

आँखों ने तो तेरी सब बयाँ कर दिया,

माना कि प्यार है खामोशियों से तुम्हे,

धडकनों ने शोर यहाँ वहां कर दिया । 

 

छुपाये रखो जज्बातों को दिल ही दिल में,

ये तो एक हसीं सी अदा है तुम्हारी,

खोले बिना लब को ये क्या किया तूने,

दिल में मेरे तूने अपना निशाँ कर दिया । 

 

अदब से पेश हुआ नजराना दिल का,

न स्वीकारा न ठुकराया तूने ये क्या किया,

बचती रही अक्सर तुम मुझसे लेकिन,

मेरी चाहत ने मशहूर तेरा जहाँ कर दिया ।

 

चुप्पी ये तेरी इकरार ही तो है ऐ “दीप”,

तुझमें ही अब सबकुछ है पा लिया मैंने,

ख्वाबों की दुनिया में ले चला तुझको,

कहाँ मैं था और तूने कहाँ कर दिया । 

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