बीमार

बीमार
तन्हा, तन्हा, हो गई आज तेरी जिंदगी;
तार, तार, हो रही आज तेरी जिंदगी;
नशा बनके बीमार बन गई; आज तेरी जिंदगी।
समाज से परिवार से, तेरे सुखी सँसार से;
अलग हो गई, आज तेरी जिंदगी।
अब होता है क्यों नाराज;
जब अपने आपसे ही भाग रही तेरी जिंदगी,
शर्मो-हया से मुंह क्यों अब छिपाता है;
जब मुंह के बल ही गिर गई; आज तेरी जिंदगी।
अब यह नशा नहीं, कोढ़ का रोग बन गई है तेरी जिंदगी।
एहसास मत समझ इसे, धिक्कारा गया है तू , और तेरी जिंदगी।
झूठ किस किस से बोलता फिरेगा;
नफरत किस किस से करता फिरेगा,
वह सब तो आबाद है,
क्या नशे से आबाद है तेरी जिंदगी ?
तेरी ही नशेबाजी आईना है तेरा;
देख ले उसमे, बर्बाद होती तेरी जिंदगी।
सब कुछ तू जानता है, वाकिफ है तू भी हकीकत से;
किस कदर बीमार है तेरी जिंदगी।
टूट चुका है तू अपने आपसे;
तेरा अब कुछ न रहा इस सँसार में;
सिर्फ शून्य बन कर रह गई है, आज तेरी जिंदगी।
तू वह कश्ती है, जिसकी पतवार टूट चुकी है;
और नशे के भँवर  में  डूब रही तेरी जिंदगी।
नशा बनके बीमार बन गई, आज तेरी जिंदगी।
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  1. Nilesh 22/10/2013

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