संग्राम

संग्राम

आज विद्यालय से सचिवालय तक कैसा संग्राम मचा,,
आबरु लुटी है बच्ची की, नेता गण कागजों में है जुटा हुआ।
कार्यवाही हो रही है, बलात्कारी फरार हो गया है,
हां..,वह पकड़ा गया है,.. पर बेल पर छूट गया है,
उसको पकड़ो, फांसी दो उसको,….
मीडिया आई है देखो, सामने ’ टेलेकास्ट ’ हो रहा है,
’’ मैडम बिंदी ठीक करो, देश देख रहा है’’
’’ तुम जरा पल्लू सीधा रखो,’ नेता ’ भी वहां खड़ा है’’’।
तुम महिला संघ की नेता हो सही दिख् रहा है।
अरे ! आबरू लुटी है जिस बच्ची की, उसके मां बाप कहां है
हां, वह विलख रहे हैं,
कोस रहे विद्यालय को, या नेता से इंसाफ मांग रहे हैं।
’ इक ब्रेकिंग न्यूज़ ’ आई है,
उस महाविद्यालय में इक और बलात्कार हुआ है,
अरे ! वह तो प्रोफेसर है,
उसने ही यह करतूत किया है।
महाविद्यालय ने बयान दिया है,
गुनाह उसने किया है, हमारा कसूर क्या है,
कल काऊंसिल की मीटिंग होगी, यही तय किया गया है,
मगर वह कल कहां है,
सब कागजों में खो गया है।
जी हां ! अब भी बलात्कार हो रहा है।
विद्यालय से महाविद्यालय तक यह कैसी नीति चल रही है,
गुरुदक्षिणा में लज्जा बच्चियों की बलि चढ़ रही है।
गुरदीप सिंह सेठी

 

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