हिंदी

दुष्शासन अपने घर आँगन,बढ खीचा जब चीर |
यू॰एन॰ओ॰बहता देखा झरझर झरझर नीर ||

देखा उनकी बोली भाषा में वही कमान व तीर |
बङे-बङे दढियल मुच्छे गाते अपने-अपने गीत ||

सह सकी सिसकती हिंदी ना अपनो का दुःख का गाये |
जाति पाति जगह जगह को भाषा अपना राग सुनाये ||

मौन मीन की गाथा गाते दिखती सकल सभायें |
चिंतित चिन्त खङी बिंदी लेकर जन की अभिलाषायें ||

मगन गगन गनगना उठा सजी धजी हिंदी की छङिकायें ||

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