जिंदा लाशें

शांति……यह कब्रगाह हैं, यहाँ जिंदा लाशें रहती है।

यहाँ आवाज करना मना है।
न………. वहाँ भी न जाना, चिता जल रही है।

यहाँ, नशे का बाजार चलता है;
वहाँ, अरमानो की चिता जलती है।
यहां जवानी मदहोशी में बदलती है;
संभलना इन्होने सीखा नहीं अभी;
टांगों की डगमगाहट, जुबान की लड़खड़ाहट
आंखों की लाल डोरियों की भी शिकस्त नहीं हुई है;
अभी तो चंद घंटे ही हुये हैं; अभी तो रात बाकी है।
जब तक जीवन का अंधकार न हो जाये;
यही तो जिंदगी की तमन्ना कहती है।
यह कब्रगाह है, यहाँ जिंदा लाशें रहती है।

वहाँ अरमानों की चिता जल रही है।
बूढ़ी माँ टी. बी. से खांस रही है;

बूढ़ा बाप पेंशन की कापी ताक रहा है;
क्या अब भी कुछ रुपये हैं बाकी,

बेटी का ब्याह रचाना है।
छोटा तो दुबई जाएगा, कहता वह जरूर है;
मगर, उसके भी लक्षण पीने में जोर है;
बड़े को अपनी नौकरी पे गरूर है;
यह उसका नही, उसके नशे का कसूर है।
सरूर में जब भी वह आयेगा;
माँ-बाप को तीरथ का सपना दिखायेगा।
बीवी रोती अलग ही से है;
मैके से जो कुछ भी थी वह लाई,

नशे में उसकी भी हो गई सफाई।
अब इतना रुपया कहां से आयेगा;
अब तक तो सब्ज बाग थे, जी लिये;
अब कयामत से कौन बच पायेगा।

ग़मज़दा है परिवार सारा,

इस नशे का ही है खेल सारा।
चिंता में ही चिता रहती है;
जब जिंदगी नशे में सिमटती है।
यह कब्रगाह है, यहां जिंदा लाशें रहती हैं।
—-

Leave a Reply