शिव स्तुति

चन्द्रमौलि चमके है चंद्र तेरे भाल पे,
भोले बाबा भंग पीए धतूरे में दाल के,
त्रिपुरारी नाच रहे डमरू की ताल पे,
लिपटी कमर शिव की बाघ की छाल से।।

रुद्र का कंठ देखो सोहे रुद्रमाल से,
नागराज लिपटे हैं देखो कंठनाल से,
हरिपददासी बहे आशुतोष के बाल से,
शिवजी बैठे है ध्यान समाधि में दाल के।।

बाजूबंद बांधा हर ने देखो रुद्रमाल का,
अंग रचाए संभू राग देखो राख़ का,
चमके है नेत्र तीजा त्रिलोकी के नाथ का,
चम-चम चमके त्रिशूल भोलेनाथ का।।

शीत समीर बहे ठंडी कैलाश पे, नंदी,
भृंगी नृत्य करे अविनाशी के पास में,
खोलेंगे पालक प्रभु बैठी गौरा आस में,
नटराज लीला रचे चहुं दिशाकास में।।

सिंगी सन-सन बोली, बाजे डमरू डम-डम,
भांग की झौंक में शंकर नाचे छम-छम,
मतवाले महादेव बोले तब बम-बम,
देख हँसे गौरजा तो दन्त चमके चम-चम।।

मृदु-मृदु गंध बहे, सुगंध कैलाश पे,
कार्तिक गजानन्द बैठे, माँ पार्वती साथ में,
चहुं नाचे रुद्रगण दे-दे ताली हाथ में,
ब्रह्मा-हरि जस गाये नारदजी के साथ में।।

विनती कुमार करे शूलपाणि सहाय करो,
त्रिनेत्रधारी बाबा मनु की सहाय करो,
अविनाशी कैलाशी वाशी काशी के सहाय करो,
भोलेनाथ भूलूँ नहीं ऐसा तो उपाय करो।।

गलती हमारी भूलो, कुमार कहे गंगाधर,
विनती हमारी सुनो क्षमा-क्षमा हे! हरिहर।।

…………………………….मनोज चारण
मो. – 9414582964

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