फूल से खूशबू कली से

फूल से खूशबू कली से मुस्कुराहट छीन ली

उसने मेरे होठ से भी गुनगुनाहट छीन ली

 

किस तरह हम जी रहे हैं बेरहम के गाँव में

मेरे दरवाजे से उसने उनकी आहट छीन ली

 

जाने ये कैसी हवा चलने लगी है आजकल

उन परिन्दों के परों के फड़फड़ाहट छीन ली

 

दिल के दरिया की तरंगें हों गई खामोश है

क्योंकि उसने हर लहर से थरथराहट छीन ली

 

सोचता हूँ किस तरह किस हाल में जी पाऊंगा

वेरहम मौसम ने हमसे सब सजावट छीन ली.

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