धधक रही है आग

धधक रही है आग हमार तन के ख़ून पसीने में

बदहाली को देख देख के आग लगी है सीने में.

 

तड़प रहे हैं बच्चे भूखे और भूख से मौत हुई

मां की ममता तड़प रही है दूध् कहां है सीने में.

 

कुत्ते खाते दूध मलाई भूखा बच्चा सोता है

भूख गरीबी बदहाली ये, सज़ा मिली है जीने में.

 

सिमट गया है धन और वैभव यहां तो चन्द घरानों में

क्यों तुम मांग रहे हो जाकर मक्का और मदीने में.

 

सबसे बड़ा अमीर यहां है सबसे बड़ा गरीब यहां

इस अन्तर को कब पाटोगे मिल कर साल महीने में.

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